बच्चों की खांसी का देसी इलाज, khansi ka ilaj

बच्चों की खांसी का देसी इलाज – अपनाये ये टिप्स

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बच्चों की खांसी का देसी इलाज – Bacho ki khansi ka Gharelu ilaj

बच्चों को खांसी की समस्या होना एक सामान्य सी घटना है यह कोई बिमारी नहीं है बल्कि शरीर में हो रही अन्य समस्याओं या बीमारियों का संकेत हो सकता है। अक्सर ऐसे मामलों में बच्चे के माता-पिता घबरा जाते हैं लेकिन इसमें परेशान होने वाली बात नहीं है आप घर पर ही बच्चों की खांसी का देसी इलाज कर सकते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि छोटे बच्चों की खांसी का इलाज संभव है जिसके लिए आप अपने घर में मौजूद कुछ खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

छोटे बच्चों की खांसी का इलाज एलोपैथिक दवाओं से करने पर उनके शरीर पर बुरा असर पड़ता है इसलिए बार बार होने वाली इस प्रक्रिया से छुटकारा पाने के लिए आप आयुर्वेदिक तरीकों को उपयोग में ला सकते हैं। आइये इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से समझते हैं कि बच्चों की खांसी का देसी इलाज (Bacho ki khansi ka gharelu ilaj) क्या है? बच्चों की काली खांसी का इलाज कैसे करते हैं? शिशु की खांसी का इलाज किन तरीकों से कर सकते हैं? और कौन से खाद्य पदार्थों के सेवन से छोटे बच्चों की खांसी का इलाज किया जा सकता है? बच्चों की खांसी कितने प्रकार की होती है? 

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बच्चो में खांसी की समस्या

बच्चों को खांसी होना एक आम बात है लेकिन यह जब लम्बे समय तक बना रहता है तो पेरेंट्स परेशान होने लगते हैं। खांसी इस बात का संकेत हो सकता है कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है या आपको वायरल इन्फेक्शन है। ये दो ऐसे कारण है जिसकी वजह से बच्चों के रेस्पिरेटरी सिस्टम में अवरोध आ जाता है और फिर खांसी होती है। 

बच्चों की खांसी के प्रकार कौन-कौन से हैं? 

खांसी के 2 वर्ग होते हैं पहले वो खांसी होते हैं जो त्रिदोष के कारण होते हैं जिसे आयुर्वेदा के अनुसार वातज, पित्तज तथा कफज़ भी कहा जाता है। जबकि दूसरे प्रकार के खांसी की वजह स्पष्ट नहीं होती है इसलिए ये ज्यादा खतरनाक भी होती हैं। इन्हे क्षतज और क्षयज कहा जाता है। अब बारी बारी से पांचों प्रकारों को समझेंगे : 

खांसी के प्रकार

वातज खांसी: यह एक प्रकार की सुखी खांसी होती है जिसमे कफ़ निकलना मुश्किल हो जाता है और बार बार के प्रयास से वातज खांसी में बच्चों के पेट, छाती, पसलियों, आदि में दर्द होने लगता है। जाने सुखी खांसी का इलाज

पित्तज खांसी: यह खांसी का एक प्रकार है जिसमे आपके कफ का स्वाद कड़वा हो जाता है और कई बार खांसते-खांसते उल्टी भी हो जाती है। ऐसी स्थिति में खांसी में जो कफ निकलता है वह पीले रंग का कड़वा पित्त होता है। आपको प्यास भी ज्यादा लगती है और शरीर में जलन भी होती है। 

कफज खांसी: इस प्रकार की खांसी में बार बार कफ आता रहता है जो स्वाद में मीठा होता होते हुए भी मुंह को कड़वा कर देता है। खाना खाने का मन नहीं होता है शरीर सुस्त पड़ने लगता है। 

क्षतज खांसी: खांसी का यह प्रकार कई अलग अलग कारणों से ट्रिगर होता है। जैसे कई बार अगर आप भारी वजन उठाते हैं तब, जब आप बहुत ज्यादा गुस्सा करते हैं तब या अगर आप किसी चीज में ज्यादा बल लगाते हैं तब इस प्रकार की खांसी हो सकती है। 

क्षयज खांसी: क्षयज खांसी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फ़ैल सकता है इसलिए यह ज्यादा खतरनाक होता है। यह संक्रामक खांसी टीबी का संकेत भी हो सकता है। शरीर धीरे धीरे कमजोर होने लगता है और बुखार तथा दर्द बना रहता है। ऐसे मामलों में बच्चों की खांसी का देसी इलाज शुरू कर देना चाहिए। 

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बच्चों को खांसी होने के कारण क्या होते हैं

बच्चों के शरीर में बाहर के वातावरण के अनुसार परिवर्तन नहीं होता है। इसलिए जब बहुत ज्यादा ठण्ड होती है या गर्मी होती है तो वो जल्दी बीमार पड़ जाते हैं और सर्दी खांसी जैसी समस्या से ग्रसित हो जाते हैं। बच्चों के शरीर में किसी भी रोग से लड़ने के लिए पर्याप्त रोग प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती है इसलिए किसी भी बीमारी का असर उनपर पहले देखा जाता है। लेकिन इसमें घबराने की बात नहीं है क्यूंकि बच्चों की खांसी का देसी इलाज उपलब्ध है जिसका कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होता है। 

बच्चों की खांसी के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं

सर्दी-जुकाम: बच्चों को खांसी सर्दी जुकाम की वजह से भी हो सकता है, ऐसी स्थिति में नाक बंद हो जाती है, बुखार, आँखों से पानी आने लगता है और गले में खरास भी हो जाती है। 

फ्लू: फ्लू के लक्षण सर्दी जुकाम की तरह ही होते हैं। बच्चे को फ्लू होने पर बुखार लगना, डायरिया, नाक बहने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं इसमें बस इतना फर्क होता है कि जहाँ सर्दी जुकाम में बलगम वाली खांसी होती है वहीँ फ्लू में सुखी खांसी होती है। 

काली खांसी: काली खांसी को आम बोलचाल की भाषा में कुकुर खांसी भी कहते हैं। इसमें सुखी खांसी होती है और यह संक्रामक भी होता है जो एक व्यक्ति से दूसरे में हो सकता है। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए जन्म के साथ ही इसका टीका लगा दिया जाता है लेकिन फिर भी कई बार बच्चे इससे प्रभावित हो जाते हैं। आयुर्वेदा में बच्चों की काली खांसी का इलाज उपलब्ध है। 

दमा और टीबी: दमा की वजह से भी बच्चों को साँस लेने में परेशानी होती है और खांसी जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। अगर बच्चे को लगातार 2 हफ्ते तक खांसी हो रही है तो टीबी का संकेत हो सकता है और ऐसी स्थिति में खांसी में खून आना एक आम बात है। ‘

प्रदुषण: अगर आपके आस पास का वातावरण स्वच्छ नहीं है उसमे किसी प्रकार के केमिकल्स या मिलावट है तो बच्चों को साँस लेने में परेशानी और खांसी जैसी समस्या होती है। 

बच्चों की खांसी के देसी इलाज (Bacho ki khansi ka ilaj)

अंगूर: शिशु की खांसी का इलाज करने के लिए आप अंगूर का इस्तेमाल कर सकते हैं। अंगूर के रस के सेवन से कफ निकल जाता है और बेहतर परिणाम के लिए आप अंगूर के रस को शहद के साथ मिलाकर रोजाना रात को सोने से पहले थोड़ा सा अपने बच्चे को पिला सकते हैं। 

शहद और नींबू: बच्चों की खांसी का देसी इलाज करने का एक बेहतरीन तरीका है एक चम्मच नींबू में 2 से 3 चम्मच शहद मिलाकर एक कंटेनर में रख लें। अब हर 2 घंटे पर बच्चे को यह मिश्रण पिलाते रहे। यह बहुत ही कारगर उपाय है। इसी के साथ आप एक कप गर्म दूध में 2 से 3 चम्मच शहद मिलाकर नियमित रूप से बच्चे को पिला सकते हैं। बच्चों की खांसी का यह देसी इलाज सर्दी जुकाम से राहत दिलाने में बहुत ही असरदार होता है। 

अदरक: छोटे बच्चों की खांसी का इलाज आप अदरक के प्रयोग द्वारा भी कर सकते हैं। 5 से 10 मिनट के लिए पानी  के साथ उबाल ले फिर उसके रस को छानकर किसी साफ़ बर्तन में स्टोर कर लें उसमे थोड़ा शहद मिला लें और बच्चे को नियमित रूप से पिलाते रहे। 

लहसुन: सर्दी जुकाम के कारण होने वाली खांसी में लहसुन एक असरदार देसी इलाज है। आप लहसुन को पीसकर उसमे शहद मिला लें और फिर अपने बच्चे को दिन में 3 बार इसका सेवन करने के लिए दें। 

तुलसी: तुलसी एक आयुर्वेदिक औषधि है जो शिशु की खांसी का इलाज इलाज करता है। आप तुलसी के पत्ते का रस निकालकर अपने बच्चे को पिला सकती हैं। 

बच्चों की खांसी का घरेलु इलाज और खान पान

  • खांसी की स्थिति में बच्चे को भरपूर तरल पदार्थ दें और अगर बच्चा अभी 6 महीने से भी कम का है तो उसे स्तनपान कराएं क्यूंकि इससे भी खांसी ठीक हो जाता है। 
  • बच्चे के उम्र के अनुसार ही घरेलु इलाज की मात्रा निश्चित करें। जैसे 6 साल से कम के बच्चे को नियमित रूप से आधी चम्मच शहद देना चाहिए। 
  • वहीँ जब बच्चे की उम्र 6 वर्ष से ज्यादा हो तो उसे एक चम्मच शहद नियमित रूप से दें। 

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(Frequently asked questions) FAQs :

Q.1 छोटे बच्चों की छाती में जमा कफ कैसे निकालें

छोटे बच्चों को स्टीम बाथ या भाप की मदद से छाती में जमा कफ से राहत दिलाई जा सकती है। इसके साथ आप तेल मालिश की मदद से भी छोटे बच्चों की छाती में जमा कफ निकाल सकते हैं। 

Q.2 नवजात शिशु को कफ हो जाए तो क्या करें

नवजात शिशु को अगर कफ हो जाये तो उसे भरपूर मात्रा में स्तनपान कराएं क्यूंकि इससे गले की खरांस ठीक होती है और कफ से भी राहत मिलता है। 

Q.3 छोटे बच्चों को भाप कैसे दें

छोटे बच्चों को भाप दिलाते समय ज्यादा सावधान रहने की आवश्यकता होती है। आप उन्हें कभी भी भाप लेने के लिए अकेला ना छोड़ें। ऐसे किसी बर्तन में भाप ना लें जिससे गर्म पानी बाहर आ सकता है क्यूंकि इससे बच्चे के जलने की सम्भावना बढ़ जाती है। 

नोट : इस ब्लॉग में दी गयी टिप्स से आप घर पर कुछ हद तक बच्चों की khansi ka ilaj कर सकते है। अगर खासी २ – ३ दिन में न जाए तो अपने पास के डॉक्टर से जरूर संपर्क करे ज्यादा दिन से हो रहे खांसी जानलेवा हो सकती है तुरंत डॉ .से मिले। उम्मीद है आपको जानकरी अच्छी लगी होगी।


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